@austin_sprinz बता रहे हैं कि आप किस तरह यह जानने के लिए अपने कंटेंट के साथ एक्सपेरिमेंट कर सकते हैं कि आपके लिए क्या काम करता है
क्रिएटर्स के लिए ऑस्टिन स्प्रिन्ज़ के टॉप टिप्स:
- कंटेंट में वैरायटी लाएँ
ऑस्टिन अपने कंटेंट को एक जैसा नहीं रखते. वे उसमें बदलाव करते रहते हैं, जिस वजह से उनका कंटेंट लगातार नई ऑडियंस तक पहुँचता है. उनके कंटेंट में लो-फ़ाई और उनके जीवन के कुछ अनोखे पलों की झलक मिलती है. - अपनी कहानी को दमदार तरीके से कहें
सिर्फ़ विज़ुअल ही कंटेंट बनाने के लिए काफ़ी नहीं हैं. चाहे वीडियो कितना भी जबरदस्त क्यों न हो, उसे मज़ेदार बनाने के लिए उसका एक ढाँचा होना और उसमें दिलचस्प कहानी होना ज़रूरी है. - नए आइडिया एक्सप्लोर करने के लिए ट्रायल रील्स का उपयोग करें
ऑस्टिन को ट्रायल रील्स की मदद से नए आइडिया आज़माने की आज़ादी मिलती है, क्योंकि इसमें नाकामयाब होने की कोई गुंजाइश नहीं है. वे इस सुविधा से बिना अपनी मौजूदा ऑडियंस की चिंता के टेस्ट कर पाते हैं और सीख पाते हैं.
ऑस्टिन स्प्रिन्ज़ ने कभी नियमों को अपनी क्रिएटिविटी पर हावी नहीं होने दिया. जब ऑस्टिन ने पहली बार ऑनलाइन पोस्ट करना शुरू किया, तो उनके पास न कोई तय फ़ॉर्मूला था, न ही कोई पहले से बना प्लान था. ऑस्टिन ने खुद को सीमित नहीं रखना चुना और उन्होंने Instagram को अपनी क्रिएटिव दुनिया बना लिया. एक ऐसी जगह जहाँ वे नए आइडिया पर लगातार एक्सपेरिमेंट कर सकें और अपनी कल्पना की सीमाओं को और आगे बढ़ा सकें.
उनका यह मस्तीभरा अंदाज़ लोगों को इतना पसंद आया कि आज उनके 4 मिलियन से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हैं. इससे यह साबित होता है कि हमेशा नियमों का पालन करना भी सही नहीं होता है और सफल होने का सबसे अच्छा तरीका है अपने खुद के रास्ते ढूँढना. हमने ऑस्टिन से मुलाकात की, ताकि उनकी कंटेंट स्ट्रेटेजी, एक्सपेरिमेंट करने का आज़माया हुआ तरीका और उन क्रिएटर्स के लिए उनकी सलाह जान सकें जो Instagram पर आगे बढ़ना चाहते हैं.
आपकी क्रिएटिव अप्रोच में एक्सपेरिमेंट करना किस हद तक ज़रूरी है?
जब आप क्रिएटर बनने का चुनाव करते हैं, तो आप दरअसल एक लंबे सफ़र पर निकल पड़ते हैं. आपकी ऑडियंस बदलती रहती है. ट्रेंड कभी एक नहीं रहते. यहाँ तक कि लोगों की दिलचस्पियाँ भी लगातार बदलती हैं. पुराने फ़ॉर्मूले पकड़कर बैठना आसान है, लेकिन अगर आप बदलते रहें और नई चीज़ें आज़माते रहें, तो आपका कंटेंट हमेशा ताज़ा रहेगा और ऑडियंस से आपका कनेक्शन भी बरकरार रहेगा. यही इस सफ़र को रोमांचक बनाए रखता है.
ऐसा लगता है जैसे आपको अपने कंफ़र्ट ज़ोन से बाहर रहकर चीज़ें करना बेहद पसंद है. आपने अब तक का सबसे हिम्मत और ज़ोखिम भरा कदम कैसे और कब उठाया?
कुछ साल पहले मुझे एक रैंडम कॉल आया. मुझसे पूछा गया कि क्या मैं बॉक्सिंग मैच करूँगा? मैंने कभी बॉक्सिंग की ही नहीं थी, फिर भी मैंने सोचा कि एक बार कोशिश करने में कोई हर्ज़ नहीं है. फिर मुझे मालूम लगा कि मैच लंदन के वेम्बली एरीना में है. वह भी एक महीने बाद और 12 हज़ार लोगों के सामने.
मैंने ऐसा पहले कभी कुछ नहीं किया था और यह मेरे कंफ़र्ट ज़ोन से बाहर था. लेकिन मेरा मानना है, जितनी मुश्किल चीज़ें आप अपनाते हैं, वे धीरे-धीरे आसान लगने लगती हैं. मैंने एक महीने अंधाधुंध ट्रेनिंग की और अपनी इस जर्नी के हर पल को रिकॉर्ड किया. और इस जर्नी ने मेरा नज़रिया बदल दिया: चाहे प्रेशर हो, परफ़ॉर्मेंस हो या स्टोरीटेलिंग.
इस एक्सपीरियंस ने मुझे एक ऐसी कंटेंट कैटेगरी से भी जोड़ दिया, जिसकी मुझे उम्मीद नहीं थी और वह है 'फ़िटनेस'. तभी से बॉक्सिंग मेरे रूटीन का हिस्सा बन गई और मैंने लाइफ़स्टाइल और वेलनेस कंटेंट पर भी फ़ोकस करना शुरू कर दिया. किसी चुनौती भरी चीज़ को ‘हाँ’ कहने से न सिर्फ़ मैं क्रिएटर के तौर पर, बल्कि इंसान के तौर पर भी बेहतर बन पाया हूँ.
पिछले दस सालों में आपके कंटेंट में किस तरह का बदलाव आया है?
काफ़ी लंबे समय तक मैं कैज़ुअल कंटेंट पोस्ट करने से डरता रहा. मुझे ऐसा लगता था कि अगर इसने अच्छा परफ़ॉर्म नहीं किया तो क्या होगा. मैं नहीं चाहता था कि मैं ऐसा कुछ ऐसा कर दूँ जिससे मेरी ऑडियंस और ब्रांड की नज़र में मेरे पेज की कोई खराब छवि बने. उस वक़्त मेरा ज़्यादातर अच्छी क्वालिटी के पॉलिश्ड और हाई-प्रोडक्शन वीडियो पर ही था. लेकिन, धीरे-धीरे एहसास हुआ कि मेरी कैमरा रोल में कितने मज़ेदार, बिना प्लानिंग के बनाए गए रैंडम क्लिप्स पड़े हैं, जिन्हें मैं शेयर ही नहीं करता था, जबकि उन्हें बनाते हुए मुझे सबसे ज़्यादा मज़ा आता था.
फिर Instagram ने ट्रायल रील्स की सुविधा लॉन्च की और वहीं से मेरी सोच बदल गई. इसने मुझे नए तरह के कंटेंट को पेश करने की आज़ादी दी. इसकी मदद से मैंने अपने कंटेंट के साथ बेझिझक एक्सपेरिमेंट करना शुरू किया. मेरे लिए यह फ़ीचर क्रिएटिव सैंडबॉक्स के तौर पर सामने आया. एक ऐसा सेफ़ स्पेस, जहाँ मुझ पर कोई दबाव नहीं होता, कोई पाबंदियाँ नहीं होती और मैं खुलकर एक्सपेरिमेंट कर सकता हूँ. जब ये रील्स अच्छा परफ़ॉर्म करती हैं, तो समझ आता है कि इन्हें मुख्य फ़ीड पर लाना चाहिए और आगे एक्सप्लोर करना चाहिए.
क्या किसी ट्रायल रील ने आपको चौंकाया है?
बिलकुल! पिछले साल सर्दियों में, मैं और मेरा भाई कोल्ड प्लंज से बर्फ़ निकालकर पूल में डाल रहे थे, ताकि उसका सिस्टम जमे नहीं. अचानक उसने मुझे धक्का देकर पानी में गिरा दिया और खुद भी कूद गया.
उसकी गर्लफ़्रेंड मज़े के लिए रिकॉर्ड कर रही थी. मैंने सोचा कि 7-सेकंड की क्लिप को ट्रायल रील के तौर पर पोस्ट करके देखते हैं. अगले ही दिन उस रील को 10 मिलियन लोगों ने देख लिया. उसके बाद वह 50 मिलियन लोगों तक पहुँच गई. और अब तक उस क्लिप को 100 मिलियन से ज़्यादा लोग देख चुके हैं. अगर ट्रायल रील्स न होतीं, तो यह क्लिप मेरे फ़ोन की मेमोरी बनकर रह जाती, जिसे और कोई नहीं देख पाता.
आपकी सबसे सफल ट्रायल रील कौन सी है?
मेरी सबसे अच्छा परफ़ॉर्म करने वाली ट्रायल रील्स में से एक रील को मैंने दुबई में शूट किया था. वीडियो की शुरुआत में बस एक सामान्य सा पूल दिखता है, लेकिन जैसे ही कैमरा पानी के अंदर जाता है, एक नई दुनिया नज़रों के सामने आ जाती है. 60 मीटर गहरा पूल, जिसमें डूबी हुई गाड़ियाँ, पूल टेबल और खज़ाना वगरैह हैं. वह एक ऐसा वीडियो है, जिसे हर कोई समझ सकता है और जिसे देखकर हर कोई उत्साहित हो जाता है.
ट्रायल रील्स की सबसे बड़ी खासियत यही है! मैं बिना किसी ऑडियो के सिर्फ़ विज़ुअल और हर किसी को पसंद और समझ आने वाले कंटेंट के बलबूते पर ही पूरी तरह नई ऑडियंस तक पहुँच सका. मेरा ज़्यादातर फ़ोकस इस चीज़ पर रहता है कि मेरा कंटेंट दुनिया भर के लोगों को समझ में आए. अगर कोई क्लिप किसी को हँसा दे या कोई उसके अंदर की भावना को जगा दे, तो चाहे भाषा कोई भी हो, वह मेरे मौजूदा ऑडियंस के अलावा और भी कई लोगों को पसंद या सकती है.
अलग तरह का कंटेंट बनाकर आपने क्या सीखा?
सिर्फ़ विज़ुअल्स काफी नहीं हैं. एक ट्रिपी टनल में चलते हुए या जेट स्की करते हुए शुरुआत में बनाई गई रील्स दिलचस्प थीं, लेकिन बिना किसी स्टोरीलाइन के, जोक या हुक के लोगों के बीच इतना असर नहीं छोड़ पाती थीं. अब मैं ऐसे विज़ुअल्स तभी पोस्ट करता हूँ, जब उन्हें कैरेक्टर या स्ट्रक्चर देकर और गहराई दे सकूँ.
आप कैसे तय करते हैं कि कब अपनी ट्रायल रील्स फ़ॉलोअर्स के साथ शेयर करनी हैं?
मैं लगभग 95% टाइम ट्रायल सिस्टम में ही एक्सपेरिमेंट करता हूँ, आइडिया टेस्ट करता हूँ और यह देखता हूँ कि लोगों को क्या पसंद आता है.
मैं कुछ भी ऑटो शेयर नहीं करता. मैंने अपने दिमाग में यह मानदंड बना लिया है कि मेरे हिसाब से कौन सा कंटेंट पोस्ट करने लायक है. अगर ट्रायल रील को करीब 1 लाख लाइक्स मिलते हैं, तो मैं इसे आम तौर पर पोस्ट करने लायक मानता हूँ. लेकिन कभी-कभी मुझे कोई वीडियो बहुत पसंद आ जाता है या मैं उस स्टाइल को और एक्सप्लोर करना चाहता हूँ, तो मैं उसे पोस्ट कर देता हूँ, भले ही उसमें 10 हज़ार लाइक आएँ.
Instagram पर आपके 4 मिलियन से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हैं. आपकी सफलता का राज़ क्या है?
लगातार पोस्ट करना, जिज्ञासा और नई चीज़ों को अपनाने के लिए हमेशा तैयार रहना. मैंने कभी भी नया मोड़ लेने या अपनी पूरी अप्रोच बदलने में डर महसूस नहीं किया. भले ही कोई चीज़ ऐसी हो जो मेरे लिए नई हो, मैं उसे आज़माने की कोशिश करूँगा. इस सोच ने मुझे उन तरीकों से बढ़ने में भी मदद की है, जिनके बारे में मैंने सोचा भी नहीं था.
मैं लोगों के देखने के अनुभव के बारे में भी बेहद सजग हूँ. मैं हर बार जब वीडियो बनाता हूँ तो खुद को पूछता हूँ “क्या यह रील मुझे स्क्रॉल करने से रोकेगी? मैं किस भावना को जगाने की कोशिश कर रहा हूँ?"
जो क्रिएटर्स Instagram पर आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए आपका सबसे अहम सुझाव क्या है?
किसी भी तरह की नई चीज़ आज़माने से पहले ज़्यादा सोचे नहीं. ज़्यादातर क्रिएटर्स यह सोचते रहते हैं कि क्या काम करेगा, जबकि असली बदलाव तब आता है जब आप यह टेस्ट करते हैं कि क्या काम कर सकता है. आपके मन के उस सबसे अजीब आइडिया को पोस्ट करें. अचानक हुए कोई मोमेंट को पोस्ट करें. वह रैंडम क्लिप पोस्ट करें, जो आपके दोस्तों को बहुत पसंद आई थी. अगर यह नहीं चला, कोई बात नहीं, कुछ और आज़माओ. अगर चल गया, तो आपने एक नया क्रिएटिव लेवल अनलॉक कर लिया है. आप लगातार कोशिश करते रहो, सफलता बस समय की बात है.


